बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कहा कि एससी, एसटी वर्ग की सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति में आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा ही सही और संवैधानिक माना है. लेकिन इसे लागू करने में जो जटिलता आई है, उस कारण यह कानूनी व्यवस्था खासकर उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से निष्क्रिय बनी हुई है. मायावती ने कहा कि इसके सही समाधान के लिए संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा से काफी संघर्ष के बाद पारित कराया गया था, जो अभी भी पिछले चार सालों से लंबित पड़ा हुआ है. इससे इन वर्गों के कर्मचारियों की अपूर्णीय क्षति हुई है.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पहले कांग्रेस और अब मोदी सरकार प्रोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर भी अपना जातिवादी रवैया त्यागने को तैयार नहीं लगती है. यही कारण है कि इस संबंध में संवैधानिक संशोधन विधेयक पर सर्वसम्मति के बावजूद लोकसभा में इसे पारित नहीं कराया जा रहा है. यह मामला लोकपाल की तरह ही लंबित पड़ा हुआ है. मायावती ने कहा कि बीजेपी सरकारों का आरक्षित वर्ग के हित व कल्याण के लिए ठोस काम करने का रिकॉर्ड जीरो रहा है. ये बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर का नाम तो वोटों के लालच में लेते हैं लेकिन उनके करोड़ों अनुयायियों को जातिवादी द्वेष, हिंसा का शिकार बनने में नहीं हिचकते हैं. इनकी सरकार में दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों आदि के प्रति हिंसा बढ़ी है.

मायावती ने कहा कि कम से कम अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्णय आने के बाद केंद्र व राज्य सरकारों को अपने पिछले तमाम निर्णयों की समीक्षा करनी चाहिए. ताकि एससी, एसटी वर्ग के सरकारी कर्मचारियों पर हुए अन्याय को दुरुस्त किया जा सके. उन्हें अभियान चलाकर प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ देना चाहिए.
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